लाई हूँ आँचल में भरकर उजाला
अँधेरे दिलों को जो रोशन करेगा।
खुशियाँ मनाओ यह है मेरा संदेशा,
गम का ना साया तुम पर पड़ेगा।१
लाई हूँ शुभ को मैं साथी बनाकर,
हर एक उद्यम जो सफल करेगा।
काल को अपना अनुचर बनाकर,
अमंगल नहीं सिर्फ मंगल करेगा।२
लाई हूँ राम को मैं वापस अयोध्या,
हर एक उजाड़ जो आबाद करेगा।
टूटे हुए हृदयों के टुकड़े जोड़कर,
उनमे जीवन का संचार करेगा ।३
लाई हूँ नयनों में जीवन की ज्योति,
कर्मपथ जिससे प्रकाशित होगा।
अपना लो इनको न सोचो जरा भी,
अंधकार का नामोनिशां न रहेगा।४
लाई हूँ होंठों पर प्रार्थनाएं सजाकर,
हर शब्द जिनका स्वीकार होगा।
उठकर मुझे तुम गले से लगा लो,
हर दर्द तुम्हारा, तुम्हारा न होगा।५
लाई हूँ लक्ष्मी को अंगुली पकड़कर,
घर-द्वार तुम्हारा समृद्ध होगा।
मत खोना ऐसा स्वर्णिम अवसर,
सिर्फ आज मिला है— कल नहीं मिलेगा।६
– कवि चेतन कुमार गुप्ता
विशेष रचनाएँ
यदि मेरी पंक्तियाँ आपके हृदय को स्पर्श करें,
तो यही मेरी लेखनी की सबसे बड़ी सफलता है।



